Wednesday, July 22, 2026

क्या जवाब दोगे….?

 प्रिय पाठकगण 

प्रस्तुत कविता मैंने हाल ही में (२०/०७/२०२६) जंतर मंतर, दिल्ली में छात्र और युवा प्रदर्शनकारियों (जो शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने हेतु खड़े थे) पर हुए पुलिस के लाठी चार्ज से नाराज़ होकर लिखी है। आपके इस बारे में क्या विचार हैं, कृपया साझा करें। 🙏🏻


बेरहमी से पीट रहे थे जब 

तुम देश के युवा और बच्चों को

क्या भूल गए थे तब तुम ख़ुद के बच्चों को?


क्या मुँह लेकर जाओगे घर

क्या जवाब दोगे अपने बच्चों को 

जब पूछेंगे वो, “पापा/मम्मी 

क्या भूल थी उन भैया और दीदी की?


कह देना “वे अपने और तुम्हारे 

उज्जवल भविष्य के लिए खड़े थे”

“अपनी बात मनवाने पे अड़े थे”

“शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने को लड़े थे।”


“गा रहे थे वे राष्ट्रीय गान”

“वंदे मातरम्” के नारे लगा रहे थे

“उम्मीद थी उन्हें कि उनकी आवाज़ सुनी जाएगी” 

“बस यही भूल थी उनकी”

परिणाम सरूप उन्हें लाठी की मार और धक्के मिले थे।”


क्या बता पाओगे ये सब अपने बच्चों को 

उनकी आँखों में आँखें डाल?


meना

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