Saturday, May 2, 2026

हर चीज़ समय से अच्छी लगती है…..

 प्रिय पाठकगण, 

प्रस्तुत कविता मैंने 07/04/2026 के दिन हुई बिन मौसम बरसात के बारे में लिखी थी। यह कविता मेरी पिछली कविता “मुझे इश्क़ है तुमसे” की अगली कड़ी है। आशा करती हूँ कि आपको यह पसंद आएगी। धन्यवाद 🙏🏻। 


माना कि हाल ही में क़बूला था मैंने 

कि “मुझे इश्क़ है तुमसे”

और अच्छा लगता है देखना तुम्हें, ऐ बारिश।

परंतु, जीवन के लिए तीनो (ऋतुएँ) ज़रूरी हैं

ठंड, बरखा और तपिश। 


सुनो, एक सखी होने के नाते बता रही हूँ तुम्हें 

कि जब तुम तय समय पर आओगी 

और हिसाब से बरसोगी 

तब सब पलकों पर बिठाएँगे और सराहेंगे, तुम्हें। 


यूँ असमय आकर 

प्रकृति के संतुलन को बिगाड़कर

ख़ामख़ाह बद्दुआ मत कमाओ। 

क्यों कि हर चीज़ समय से अच्छी लगती है। 


मुझे इश्क़ है तुमसे और हमेशा रहेगा। 

अपनी मर्यादा में रहोगी 

तो जीवन भी सुखद चलेगा। 


meना

Sunday, April 5, 2026

मुझे इश्क़ है तुमसे …..

प्रिय पाठकगण, 

प्रस्तुत कविता मैंने 30/03/2026 के दिन लिखी थी। आप जैसे जैसे इस कविता को पढ़ेंगे, वैसे वैसे आपको इसे लिखने के पीछे का कारण समझ आ जाएगा। आशा करती हूँ कि आपको मेरी यह रचना भी पसंद आएगी। धन्यवाद 🙏🏻। 



जब भी आती हो, अपना दीवाना बनाती हो, क़सम से; 

कभी अचानक दिख जाना

कभी इंतज़ार करने पर भी ना आना 

तुम्हारी ये अदा भी पसंद है दिल से। 


जान ही निकाल देती हो;

अपनी मद्धम, कभी तीव्र चाल से। 

कैसा महसूस होता है तब

पूछो ना मेरा हाल रे। 


वो सौंधी खुशबू और चंचल हवा;

चलती है जब साथ तुम्हारे

कैसे रोकूँ ख़ुद को मिलने से

के दिल नहीं रहता बस में मेरे। 


लो, आज क़ुबूल करती हूँ; 

कि मुझे इश्क़ है तुमसे 

और तुम्हारे हर एक नाम से 

वर्षा, बरखा, वृष्टि, बारिश

पुकारूँ चाहे जिस नाम से। 


meना

Friday, March 27, 2026

स्वीकृति से आकृति

 प्रिय पाठकगण,

मेरी प्रस्तुत कविता हर उस व्यक्ति के लिए है जो स्वयं से अधिक औरों के लिए जीता है। औरों के बारे में सोचता है। अथवा कहीं न कहीं किसी बात से डरता है। आप मेरे इन विचारों से कितना सहमत हैं अथवा आपके इस बारे में क्या विचार हैं, कमेंट करके अवश्य बताएँ। धन्यवाद 🙏🏻 


सुनो,

नकारात्मक, व्यर्थ, बेतुकी 

बातों को इनकार करो। 


मन को जो विचलित करें 

ऐसे विचारों को धुतकार करो। 


लोग क्या सोचेंगे, कहेंगे अथवा करेंगे 

इस चिंतन को दिल से बाहर करो। 


और, बदल ना सको जिनको 

ऐसी परिस्थिति अथवा व्यक्ति

को स्वीकार करो।


स्वयं को भी जैसी हो वैसी 

स्वीकार करो, meना। 


के स्वीकृति से आकृति बनेगी, 

आकृति प्रेम स्वरूप की,

आकृति तुम्हारे निज रूप की। 


meना

Tuesday, March 10, 2026

ख़ुशी

देखी, पर दिखी नहीं 

ढूंढी, पर मिली नहीं 

ख़ुशी, जो औरों की आँखों में देखनी चाही।


पर जब स्वयं पे निवेश किया

ख़ुद पे खर्च किया, वक़्त 

तब मिल गई ख़ुशी

जो भीतर थी मेरे 

जहाँ से वह कभी गई ही नहीं। 


meना

Saturday, February 7, 2026

समर्पण

07/02/2026 


ज़िंदगी की नाव 🚣 हर बार सरल नहीं चलती 

कई बार, मनचाही मंज़िल नहीं मिलती। 

आसान नहीं होता तूफानों में डटे रहना 

के तूफानों से जीत सबको नहीं मिलती। 


तूफ़ान, परीक्षा हैं हमारे धैर्य और समर्पण की

सौंपना पड़ता है तब ख़ुद को उस तिनके की तरह

जिसे नदी के बहाव का सहारा है 

और भरोसा है कि नदी उसे डूबने नहीं देगी। 


meना 

Tuesday, November 25, 2025

शिखर ⛰️

२५/११/२०२५

प्रिय पाठकगण 

नमस्कार 🙏🏻

Blind Women’s Cricket Team द्वारा जीते गए प्रारंभिक टी२० वर्ल्ड कप से प्रेरित यह कविता उन सभी महिला खिलाड़ियों को समर्पित है जिन्होंने देश, राज्य या किसी भी स्तर पर खेले अपने खेल के द्वारा देश और परिवार का नाम रोशन किया है।🫡



शिखर 

शिखर तक के रास्ते सरल नहीं होते 🧗‍♂️

अक्सर सफलता से चूक जाते हैं;

जिनके इरादे अटल नहीं होते। 


meना

Monday, November 3, 2025

बिन मौसम बरसात ☔️

 03/11/2025

प्रिय पाठकगण, 

नमस्ते 🙏🏻 । आज शाम हुई तेज ( गरजती-बरसती) बारिश पे मैंने कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं। आशा करती हूँ आप भी मेरे इन विचारों से सहमत होंगे। 


बिन मौसम बरसात ☔️ 


तुम बरस रही हो या के डरा रही हो, ऐ बारिश 🌧️ ?

ज़रा तो ख़ौफ़ खाओ उस मालिक का

के यह नवंबर का महीना है, जुलाई का नहीं। 


सुनो; तुम यूँ बेख़ौफ़, खुले आम, कभी भी; न बरसा करो। 

जाओ, अब घर जाओ, थोड़ा तो विश्राम करो। 

के अगले साल फिर आना है तुम्हें; सज सँवर कर। 

तब तक बाक़ी ऋतुओं को भी; अपना जलवा दिखाने दो। 😊



meना