प्रिय पाठकगण,
प्रस्तुत कविता मैंने 07/04/2026 के दिन हुई बिन मौसम बरसात के बारे में लिखी थी। यह कविता मेरी पिछली कविता “मुझे इश्क़ है तुमसे” की अगली कड़ी है। आशा करती हूँ कि आपको यह पसंद आएगी। धन्यवाद 🙏🏻।
माना कि हाल ही में क़बूला था मैंने
कि “मुझे इश्क़ है तुमसे”
और अच्छा लगता है देखना तुम्हें, ऐ बारिश।
परंतु, जीवन के लिए तीनो (ऋतुएँ) ज़रूरी हैं
ठंड, बरखा और तपिश।
सुनो, एक सखी होने के नाते बता रही हूँ तुम्हें
कि जब तुम तय समय पर आओगी
और हिसाब से बरसोगी
तब सब पलकों पर बिठाएँगे और सराहेंगे, तुम्हें।
यूँ असमय आकर
प्रकृति के संतुलन को बिगाड़कर
ख़ामख़ाह बद्दुआ मत कमाओ।
क्यों कि हर चीज़ समय से अच्छी लगती है।
मुझे इश्क़ है तुमसे और हमेशा रहेगा।
अपनी मर्यादा में रहोगी
तो जीवन भी सुखद चलेगा।
meना