प्रिय पाठकगण,
प्रस्तुत कविता मैंने 30/03/2026 के दिन लिखी थी। आप जैसे जैसे इस कविता को पढ़ेंगे, वैसे वैसे आपको इसे लिखने के पीछे का कारण समझ आ जाएगा। आशा करती हूँ कि आपको मेरी यह रचना भी पसंद आएगी। धन्यवाद 🙏🏻।
जब भी आती हो, अपना दीवाना बनाती हो, क़सम से;
कभी अचानक दिख जाना
कभी इंतज़ार करने पर भी ना आना
तुम्हारी ये अदा भी पसंद है दिल से।
जान ही निकाल देती हो;
अपनी मद्धम, कभी तीव्र चाल से।
कैसा महसूस होता है तब
पूछो ना मेरा हाल रे।
वो सौंधी खुशबू और चंचल हवा;
चलती है जब साथ तुम्हारे
कैसे रोकूँ ख़ुद को मिलने से
के दिल नहीं रहता बस में मेरे।
लो, आज क़ुबूल करती हूँ;
कि मुझे इश्क़ है तुमसे
और तुम्हारे हर एक नाम से
वर्षा, बरखा, वृष्टि, बारिश
पुकारूँ चाहे जिस नाम से।
meना
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