Saturday, February 7, 2026

समर्पण

07/02/2026 


ज़िंदगी की नाव 🚣 हर बार सरल नहीं चलती 

कई बार, मनचाही मंज़िल नहीं मिलती। 

आसान नहीं होता तूफानों में डटे रहना 

के तूफानों से जीत सबको नहीं मिलती। 


तूफ़ान, परीक्षा हैं हमारे धैर्य और समर्पण की

सौंपना पड़ता है तब ख़ुद को उस तिनके की तरह

जिसे नदी के बहाव का सहारा है 

और भरोसा है कि नदी उसे डूबने नहीं देगी। 


meना 

6 comments:

  1. Great words...Your words always inspiring and motivating.. 🙏🙏

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    1. Thank you for liking my poems and finding them motivating. Your kind words motivate me to keep going.🙏

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  2. अति सुन्दर प्रस्तुति, जीवन की सच्चाई यही है

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    1. Dhanyawad maa 🙏. Aapka ashirwad aise hee bana rahe.😇

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